



-प्रीतिमा वत्स






किसने लिखी होगी ये लोक कविता...शायद किसी को नहीं मालुम?.....उस कवि ने भी अपने नाम की चिन्ता न की होगी। 
उचित समय पर वर नहीं मिल रहा हो, तो लड़की का विवाह फूलों के गुच्छे को वर के स्थान पर रखकर कर दिया जाता है। गुजरात तथा झारखंड के कुछ हिस्सों में पहले वृक्ष विवाह किया जाता है। इनमें वर का विवाह पहले आम के पेड़ से होता है तथा कन्या का विवाह महुए के पेड़ से होता है। 
गणेश जी पिता की खोज में निकल पड़े। शंकर जी से उनकी भेंट हरिद्वार में हुई। वे कार्तिकेय तथा विष्णु भगवान के साथ इधर-उधर घूम रहे थे। वे पार्वती जी से बहुत नाराज थे और उनके पास नहीं जाना चाह रहे थे। इसलिए गणेश जी के आने से वे प्रसन्न नहीं हुए। शंकर जी की इच्छा को जानकर उनके भक्त रावण ने बिल्ली का रूप धारणकर गणेश जी के वाहन चूहे को डरा दिया। चूहा गणेश जी को गिराकर अपनी जान लेकर भागा। तब गणेश जी अपना भारी-भरकम शरीर लेकर धीरे-धीरे चलने लगे। इधर शंकर जी की इच्छा से विष्णु भगवान ने पासा का रूप धारण किया। इसी वीच गणेशजी ने शंकर जी के समीप पहुँचकर माता का सन्देश कहा। तब महादेव ने उनसे कहा कि हमने नया पासा बनवाया है, यदि तुमाहारी माँ फिर से खेलने के लिए राजी हों तो मैं चल सकता हूँ। गणेश जी ने जब आश्वासन दिया तब शंकर जी पार्वती जी के पास अपने दल-बल के साथ वापस आए। शंकर जी ने आते हीं पार्वती से खेलने के लिए कहा और अपने नये पासे की चर्चा की। पार्वती जी ने हँस कर कहा आपके पास है क्या चीज जिससे खेला जाएगा। यह सुनकर शंकर जी चुप हो गए। नारद जी अपनी वीणा आदि सामग्री उन्हे दे दी। इस बार महादेव हर बार जीतने लगे। एक- दो पासे के बाद गणेश जी को उनके कपट का पता चल गया और उन्होने अपनी माँ को यह बात बता दी। पार्वती जी को बहुत क्रोध आ गया । रावण ने बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन उनका क्रोध शांत नहीं हुआ और उन्होंने शंकर जी को यह शाप दे दिया कि गंगा की धारा का बोझ हमेशा उनके सिर पर बना रहेगा। नारद जी को शाप दिया कि तुम धूर्तता करते हो, अतः कभी एक स्थान पर दो धड़ी के लिए भी जमकर नही बैठ सकोगे। भगवान् विष्णु को शाप दिया कि यही रावण तुम्हारा परम शत्रु होगा। रावण को शाप दिया कि तुम्हारा विनाश यही विष्णु करेंगे। कार्तिकेय को शाप दिया कि तुम कभी जवान नहीं होगे। आज भी उगाए जाते हैं टोकरियों में गेहूँ / जौ के पौधे और मनाया जाता है कजलिया पर्व प्रकृति प्रेम और खुशहाली को समर्पित पर्व कजलिया या भु...