Wednesday, August 16, 2017

जरा खेलने तो दो मुझे


राजू आज भी अपने कमरे में सर पकड़ कर बैठा है, शायद आज भी स्कूल नहीं जा पाएगा। इस महीने यह चौथा दिन है ऐसा कि वह स्कूल नहीं जा रहा है।

उसकी माँ राजू के पापा से कह रही है, कितने हीं डॉक्टर को दिखा चुकी पर कोई फायदा हो नहीं रहा। सब डॉक्टर एक ही बात कहते हैं। बच्चे को फिजीकल गेम खेलने दिया करो। आउटडोर गेम खेलने से उसको भूख लगेगी, थकेगा और ठीक से खाना खाएगा, कब्ज की परेशानी दूर होगी। अच्छी नींद आएगी। दिमाग फ्रेश रहेगा और सरदर्द अपने-आप ठीक हो जाएगा। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी सेहत के लिए आवश्यक है। आगे पढ़ने के लिए दिए हुए लिंक पर क्लिक करें-


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Saturday, August 12, 2017

रथयात्रा और राम-जानकी दर्शन की एक याद




एक सुबह जब मैं उठी, बहुत ही सुहावना मौसम था मन कर रहा था फिर सो जाऊँ। तब-तक सोती रहूँ जब-तक कि माँ के डाँटने की आवाज न आने लगे। अभी तो माँ प्यार से हम तीनों भाई –बहनों को उठा रही थीं,उठ जाओ बच्चो स्कूल का टाइम हो रहा है। अचानक माँ की आवाज आनी बंद हो गई, हमने सोचा माँ शायद किचन में गई होंगी।थोड़ी देर में माँ फिर घबराती हुई आईं और जल्दी से हम तीनों भाई-बहनों को उठाया। अरे उठ जा शायद स्कूल बंद हो गया है,इलाके में दंगा होने वाला है। हमलोग सहमते हुए उठे और एक-दूसरे के साथ सिमट गए। माँ बोलीं, जल्दी-जल्दी ब्रश करके फ्रेश हो जाओ, बाहर मत जाना, छोटे को भी अपने साथ हीं रखना, बाहर शायद दंगा होनेवाला है। कुछ लोगों ने शायद अयोध्या के बाबरी मस्जिद को गिरा दिया है। देश में बड़ा ही तनाव का माहौल है। हम चारों भाई-बहन सहमते हुए बाहर निकले। पहली बार हमने अपने दादा जी के चेहरे पर डर देखा था। वो अपनी आदत के विपरीत बड़े ही नरम स्वर में बोले- बच्चो बाहर कोई मत जाना। विश्व हिन्दु परिषद वाले लोग घूम रहे हैं अपने हथियारों के साथ शायद हिन्दू-मुसलमानों का दंगा होनेवाला है। वो हमें अपने ढंग से समझाकर अपने कमरे में चले गए। आगे पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें -

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Friday, August 11, 2017

कृष्ण ने फिर चुना अर्जुन को


कृष्ण की दो बहने थीं- द्रौपदी और सुभद्रा। द्रौपदी कृष्ण की मुँहबोली बहन थी। जिसे कृष्ण इतना प्यार करते थे कि अपने नाम से जोड़कर एक नाम कृष्णा भी दिया था। द्रौपदी राजा द्रुपद की पुत्री थी,जो उन्हें पुत्र प्राप्ति हेतु किए जा रहे यज्ञ के दौरान दृष्टद्युम्न के साथ हवनकुंड से प्राप्त हुई थी। आगे पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें-
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Sunday, August 6, 2017

कृष्ण ने लाज रख ली द्रौपदी के रक्षासूत्र की








इन्द्रप्रस्थ के राजा युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ का आयोजन किया था। सम्पूर्ण आर्यावर्त के सभी जाने-माने राजा इस यज्ञ में आमंत्रित थे। अतिथि सत्कार के बाद अग्रिम पूजा की बारी आई। सबकी सहमति से युधिष्ठिर श्री कृष्ण की अग्रिम पूजा करने आगे बढ़े, ज्योहिं उन्होंने सोने के परात में प्रभु के चरण धोने के लिए रखे। पीछे से चेदि राजा शिशुपाल बहुत ही असभ्य तरीके से गरजता हुआ खड़ा हो गया और श्री कृष्ण के अग्रिम पूजा का विरोध करने लगा। पूरी सभा ने शिशुपाल को समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माना,और कृष्ण का अपमान करता रहा। कृष्ण चुपचाप सुन रहे थे और मन ही मन उसके सौ गलतियों के पूरा होने की प्रतिक्षा कर रहे थे, क्योंकि कृष्ण ने शिशुपाल की माँ को उसके किए सौ गलतियों के लिए माफ करने का वचन दिया था। जिस समय शिशुपाल की सौ गलतियाँ पूरी हो गई, कृष्ण ने कहा , बस शिशुपाल अब और नहीं। तुम्हारी गलतियाँ माफी की पराकाष्ठा पार कर चुकी हैं। क्रोध से काँपते कृष्ण के हाथ में सुदर्शन चक्र नाचने लगा। देखते ही देखते चक्र हाथ से निकला और शिशुपाल के सर को धड़ से अलग करता हुआ पुनः कृष्ण की अंगुलियों में समा गया। उसी समय कृष्ण की अंगुली पर द्रौपदी को खून नजर आया। वह घबरा गईं और अपना दुपट्टा फाड़कर कृष्ण की अंगुली पर बाँध दिया।
कृष्ण ने बड़े प्यार से द्रौपदी से कहा, हे कृष्णा मेरी प्यारी बहन आज तुम्हारे प्यार का ऋणी हो गया मैं तो। समय आने पर मैं तुम्हारे इस रक्षासूत्र के एक-एक धागे की कीमत अदा कर दूंगा। जिसे युगों-युगों तक संसार याद रखेगा और आदर्श मानेगा। 

उस वक्त किसी की समझ में कुछ नहीं आया लेकिन द्रौपदी चीरहरण के समय कृष्ण ने जो किया वह तो सर्वविदित है।

-प्रीतिमा वत्स

Thursday, August 3, 2017

शिव को समर्पित सावन (SHIV KO SAMARPIT SAWAN)


हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार सावन का महीना शिव को समर्पित है। कहा जाता है कि इस महीने में शिवजी की विशेष कृपा रहती है अपने भक्तों पर। जो भी व्यक्ति भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहता है ,उन्हें सावन के महीने में जरुर शिव की अराधना करनी चाहिए। जो भक्त इस महीने में शिव जी का ध्यान सच्चे मन से करते हैं उन्हें अवश्य ही महादेव की कृपा प्राप्त होती है।आगे पढ़ने के लिए दिए हुए लिंक पर क्लिक करें।
-प्रीतिमा वत्स

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Wednesday, August 2, 2017

देवों को भी भाए हरा रंग सावन में


जब चारों तरफ छाई हुई हरियाली हो, किसानों के चेहरे खिले हुए हों, खेतों का रंग हरा हो, महिलाओं के हाथों की चूड़ियों और उनके कपड़ों का रंग हरा हो, रह-रहकर बारिश की बूंदों से मन भींग-भींग जाता हो, मतलब इतना खूबसूरत नजारा मानों पूरी प्रकृति श्रृंगार करके खड़ी हो तब लगता है जैसे सावन आया है। और जब पूरी प्रकृति खुश तो परमात्मा कैसे अछूते रह सकते हैं। इसलिए कहा जाता है कि देवताओं को भी भाता है हरा रंग। आगे पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें। 

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Tuesday, August 1, 2017

कितनी बार रोए राम kitni bar roe ram

मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्म अयोध्या के राजघराने में हुआ था। उनके पिता राजा दशरथ उस समय के सबसे शक्तिशाली राजा थे। बेहद आलीशान तरीके से बीता उनका बचपन,लेकिन बाकी की जिन्दगी में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।



बहुत ही धैर्य और मर्यादा के अपना जीवन जीने वाले राम अपने खुद के जीवन काल में तीन बार रोए थे।

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जरा खेलने तो दो मुझे

राजू आज भी अपने कमरे में सर पकड़ कर बैठा है, शायद आज भी स्कूल नहीं जा पाएगा। इस महीने यह चौथा दिन है ऐसा कि वह स्कूल नहीं जा रहा है। ...