Thursday, June 20, 2013
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बनसत्तो माई : साग, जंगल और लोक की एक पुरानी स्मृति
संथाल परगना का लोक केवल संतालों का लोक नहीं है। यहां जितने जंगल हैं , उतनी ही बोलियां हैं। जितनी नदियां हैं , उतनी ही स्मृतियां। संतालों के ...
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पिछले पोस्ट में मैंने दो उपनयन गीत डाला था, कमेंट के माध्यम से भी और ईमेल के जरिए भी इन गीतो को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का सुझाव मिला था,...
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उचित समय पर वर नहीं मिल रहा हो, तो लड़की का विवाह फूलों के गुच्छे को वर के स्थान पर रखकर कर दिया जाता है। गुजरात तथा झारखंड के कुछ हिस्सों म...
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झारखंड के आदिवासी समाज में कथा वाचन की परंपरा अब भी बनी हुई है। यहाँ पर पुरानी पीढी के लोग आज भी अपने बच्चो को कथा कहानी सुनाते हुए देखे जात...
