Saturday, March 7, 2009

फुलवा जैसनी सुकुमार


बिहार और झारखंड (प्राचीन अंगजनपद) के कुछ हिस्सों में आज भी होरी (होली पर गाया जानेवाला गीत) अपने पुराने अंदाज और ठाट से गाया जाता है। शिवरात्रि के दिन से आरंभ होकर होलिका दहन के दिन तक रोज रात में गाया जाता है। दिनभर के कामों से निवृत होकर जब लोग रात को करीव दस बजे होरी गाने बैठते हैं तो मानों नयी स्फुर्ति से भर जाते हैं। पुरुषों की भीड़ में कोई एक पुरुष महिलाओं के कपड़े पहनकर भी नाचता है। और पूरा गांव होली के रंग में आधी रात तक डूबा रहता है।

होली के कुछ गीत-

1.
गोरिया पातरी हे गोरिया पातरी
गोरिया पातरी----------------।
जैसे लचके अंगुरिया के डार, गोरिया पातरी,
होरी हो-------होरी हो-----------।
पनवा जैसनी हे गोरिया पातरी छितरी
फुलवा जैसनी सुकुमार,
सोनवा जैसनी हे गोरिया देखैम् सुन्दरी
बिजुरी छिटकावै बतीसो दाँत
होरी हो--------होरी हो---------।
गोरिया पातरी हे, गोरिया पातरी।।


अर्थ- इस होरी में गोरी (नारी) के दैहिक सुन्दरता का वर्णन है। गोरी बहुत नाजुक और पतली है। जैसे अंगुर की बेल लचकती है वैसे ही गोरी का कमर लचकता है।
गोरी पान के जैसे पतली और फूल से भी सुकुमार है। सोने के जैसी सुन्दर है। बत्तीसो दांत तो मानों बिजली की तरह चमकते हैं।


2.
राधा संग श्याम खेले होली,
राधा संग--------------------।
राधा संग श्याम खेले होली,
राधा संग-------------------।
होरी हो----होरी हो---------।
किनका के हाथ कनक पिचकारी,
किनका हाथ अबीर झोली, राधा संग,
हो राधा संग श्याम खेले होली,
राधा संग------------------.
कृष्णा के हाथ कनक पिचकारी,
राधा रानी हाथ अबीर झोली
राधा संग-------------------।
राधा संग श्याम खेले होली,
राधा संग----------------------।


अर्थ- इस होरी में राधा और श्याम के द्वारा खेले गये होली का वर्णन है।
राधा के संग श्याम होली खेल रहे हैं। कृष्ण के हाथों में सोने की पिचकारी है
और राधा के हाथों में अबीर की झोली है।
दोनों एक दूसरे में मस्त हैं और होली खेल रहे हैं।

3.
बिकन चले, बिकन चले तीनों प्राणी है दानी बिकन चले।
कौनी घर में राजा बिक गये, किनका घर में रानी,
किनका घर में रोहित बिक गये।
बिक गए तीनों प्राणी हो दानी बिकन चले।
होली हो----------होली हो--------------।
डोम घर में राजा बिक गए, मालिनी घर में रानी,
डोम घर में रोहित बिक गए।
बिक गए तीनों प्राणी हो दानी बिकन चले।
होली हो---------होली हो-------------।


अर्थ- इस होरी में राजा हरिश्चन्द्र के सपरिवार बिकने की बड़ी मार्मिक कथा है।
किस घर में राजा बिक गए और किस घर में रानी, कौन से घर में राजकुमार रोहित बिक गए।
आज तो पूरा परिवार हीं बिकने को निकल पड़ा है।
डोम के घर में राजा बिक गए, मालिन के घर में रानी सैव्या बिक गईं।
डोम के घर में ही राजकुमार रोहित बिक गए।
के आज तो तीनों प्राणी ही बिक गए।

-प्रीतिमा वत्स

4 comments:

कितने अपने थे वे आँगन

Intro- इसी आँगन में चलना सीखा,इसी आँगन में खेलकर बड़ी हुई, इसी आँगन में पति के साथ अग्नि के सात फेरे लिए और इसी आँगन की देहरी से विदा हु...