Monday, August 2, 2010

लोकरंग मड़ई में

मड़ई का नया अंक आ चुका है। (मड़ई-2009) मड़ई के संपादक डॉ कालीचरण यादव हैं। जो वर्षों से लोक कला के उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।
मैं डॉ कालीचरण यादव जी को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानती हूं परन्तु मुझे यह पत्रिका इतनी प्रभावी और मुकम्मल लगती है कि मैं इसे अपने छोटे से ब्लाग के माध्यम से आपलोगों की जानकारी में भी देना चाहती हूं। वैसे लोक और साहित्य की दुनिया में यह पत्रिका काफी चर्चित है। मुझे उम्मीद है कि कालीचरण जी को मेरी यह हिमाकत बुरी नहीं लगेगी।




No comments:

Post a Comment

बनसत्तो माई : साग, जंगल और लोक की एक पुरानी स्मृति

संथाल परगना का लोक केवल संतालों का लोक नहीं है। यहां जितने जंगल हैं , उतनी ही बोलियां हैं। जितनी नदियां हैं , उतनी ही स्मृतियां। संतालों के ...