Tuesday, January 1, 2008

लोक देव हनुमान


हनुमान एक अखिल भारतीय लोक देव हैं। कन्या कुमारी से काश्मीर तक तथा द्वारका से कामाख्या तक उसका देवस्वरूप लोकमान्य हैं। केरल मे शुचीन्द्रम के शिवालय की सन्निधि में उसकी लघुमूर्ति है, तो तमिलनाडु में नामक्कल वैष्णव मन्दिर के सामने उसकी मूर्ति तीन पुरूष लम्बे कद की है। कर्नाटक के लोकना्टय यक्षगान में हनुमान का पात्र महत्वपूर्ण होता है। महाराष्ट्र में गांवों के प्रवेशद्वारों में मारूति प्रतिष्ठित रहता है। नासिक- पंचवटी के राममंन्दिर के सम्मुख हनुमान की पत्थरमूर्ति पर धातु का टोप चढाया हुआ है। किन्तु पास ही टाककी गांव में गोबर तथा मिट्टी का मारुति स्थित है, जिसकी साक्ष्य में समर्थ रामदास ने सत्रहवीं सदी में बरसों तप किया था। मध्यप्रदेश के बस्तर में आदिवासी हनुमान खुले आंगन में भुनी मिट्टी का शिल्प होता है। वहां हिमाचल में घर की पुती दीवार पर हनुमान जी की लेप की मूर्ति पूजनीय रहती है। वाराणसी में तुलसीदासजी का बाल हनुमान भक्तजनों को प्रिय है, वैसे ही उसका पंचमुखीभव्य रूप संकटमोचन होकर प्रार्थनीय है। अंगजनपद के हर घर हर मोड, हर चौराहे पर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। मीरा के राजस्थान,कृष्णजी की मथुरा, जगन्नाथजी का ओडिया..... विभिन्न कारीगरी में हनुमान साकार करते हैं। मिट्टी,काठ,पत्थर आदि में, अथवा केवल मानसिक रूप में, शक्ति तथा बुद्धि,युक्ति तथा सरलता, भक्ति तथा भक्तसहायता, लघुता तथा विशालता आदि परस्पर विरूद्ध गुणों का भाजन हनुमान माना जाता है।
फिर भी उनका मूर्तरूप, राम कृष्ण जैसे अवतार, शंकर पार्वती जैसे देवता, आदि के समान, मानव का न होकर सपुच्छ वानर का ही रहता है। गाय अथवा नाग अपने प्राणिरूप में पूज्य हैं, उस प्रकार वानर स्वयं पूज्य नहीं होते। फिर भी खेत में ऊधम मचानेवाले वानर को किसी हद तक अभय प्राप्त है, अथवा गांव में मृत वानर के यात्रापूर्वक संस्कार किये जाते हैं- यह मानकर कि वह हनुमान के वंशज हैं। सारांश, वानर नाम प्राणी में देवत्व नहीं, हनुमान नामक देव वानर हैं। हनुमान का रूप वानर का है, किन्तु उसका चरित्र दैवी है। यह भावना इतनी दृढ तथा सर्वगामी है कि, शिल्प चित्र या अन्य कारीगरी की तफतीस कुछ भी हो, वानर का चेहरातथा पूंछ उसमें अवश्य होते हैं।
एक सामान्य वानर को प्राप्त न होने वाला देवत्व हनुमान को कैसे प्राप्त हुआ । भारत भर में इसका उत्तर उसके विलक्षण कर्मों के कारण यही होगा। जन्म लेते ही सूर्य के प्रति उडान, लंकादहन तथा औषधियों के लिए पर्वत उठाकर लाना......... ये दिव्य कर्म करने वाला दैवी वानर यही हनुमान की लोकमानस में प्रतिमा है।

प्रीतिमा वत्स

No comments:

Post a Comment

सावन में यूं सजते हैं शिव

http://tz.ucweb.com/7_1gY1i