Monday, May 31, 2010

जनसत्ता में लोकरंग- सौंदर्य का विस्तार

जनसत्ता नई दिल्ली, 31 मई 2010.

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बनसत्तो माई : साग, जंगल और लोक की एक पुरानी स्मृति

संथाल परगना का लोक केवल संतालों का लोक नहीं है। यहां जितने जंगल हैं , उतनी ही बोलियां हैं। जितनी नदियां हैं , उतनी ही स्मृतियां। संतालों के ...