Tuesday, September 9, 2008

कर्ण का पुनर्जन्म


आश्विन महीने के कृष्णपक्ष के पंद्रह दिन पितृपक्ष के नाम से विख्यात है। इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर पार्वण श्राद्ध करते हैं।पुराणों में कई कथाएँ इस उपलक्ष्य को लेकर हैं जिसमें कर्ण के पुनर्जन्म की कथा काफी प्रचलित है।

अंगराज कुंती पुत्र कर्ण परम दानी था। वह नित्य सवा मन सोना विद्वान, सदाचारी एवं कुलीन ब्राह्मणों को दान करता था, किन्तु सोने के साथ किसी अन्य वस्तु का दान नहीं करता था। जब उसकी मृत्यु हुई तो वह अपने अच्छे कर्मों की वजह से स्वर्ग लोक में पहुँचा। मृत्यु लोक में दिए गए सोने के दान के फलस्वरूप उसे स्वर्ग में एक स्वर्ण निर्मित आलीशान महल रहने को मिला, किन्तु उसके भीतर और कुछ भी नहीं था। कर्ण को यह देखकर बड़ा दुख हुआ, किन्तु अब हो ही क्या सकता था। महल के रक्षकों ने उन्हे बताया कि मनुष्य मृत्यु लोक में जो कुछ दान करता है, वही उसे यहाँ प्राप्त होता है। कर्ण ने देवराज और यमराज से प्रार्थना करके कहा कि एक पक्ष के लिए उन्हे पुनः धरती पर वापस भेजा जाय, जिससे वे अपने छूटे हुए कर्मों को पूरा कर सके। कर्ण की प्रार्थना स्वीकृत हो गई। फिर तो धरती पर आकर कर्ण ने पंद्रह दिनों तक बड़े संयम और सदाचार से विविध प्रकार की वस्तुओं के दान किए, उसके बाद पुनः कर्ण का स्वर्गवास हुआ। इन पंद्रह दिनों के जीवन में वे दान पुण्य करने में इतने अधिक व्यस्त थे कि हजामत भी नहीं करा सके। उनके इस जीवन के अच्छे कर्मों का फल यह हुआ, कि अब की बार उन्हें स्वर्ग में सब प्रकार के सुख मिले।

कहा जाता है कि दानी कर्ण के पुनर्जीवन के ये पंद्रह दिन इसी पितृपक्ष के थे। तभी से पितृपक्ष में संयम, सदाचार एवं दानादि की अपार महिमा बताई गई है।

-प्रीतिमा वत्स

5 comments:

  1. प्रीतिमा जी,

    हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है। आपके बारे में जानकर बहुत खुशी हुई, विशेषरूप से आपका रंगों से प्यार एवं अन्य सांस्कृतिक आदतों के बारे में।

    लिखते रहिये। कोशिश करियेगा कि आपका ब्लाग दूसरों से किसी न किसी माने में भिन्न रहे। यही हिन्दी ब्लागिंग का तकाजा है।

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  2. बढिया जानकारी..
    ऐसे ही ज्ञानवर्धन करते रहिये,
    साधुवाद

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  3. pratimaji aapney bhartiya sanskiriti sey judi bahut achchi jankari di. is kram ko jari rakhiye.

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  4. yatharthvadita par aapke comment ke madhyam se lok-rang tak pahuncha, sundar krutiya,informative blogs..dhanyavaad.
    m.hashmi

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  5. Aaj Pata chala ki Pitripaksha kya hota hai, pleas also tell that why in Gaya only.

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