Saturday, August 12, 2017

रथयात्रा और राम-जानकी दर्शन की एक याद




एक सुबह जब मैं उठी, बहुत ही सुहावना मौसम था मन कर रहा था फिर सो जाऊँ। तब-तक सोती रहूँ जब-तक कि माँ के डाँटने की आवाज न आने लगे। अभी तो माँ प्यार से हम तीनों भाई –बहनों को उठा रही थीं,उठ जाओ बच्चो स्कूल का टाइम हो रहा है। अचानक माँ की आवाज आनी बंद हो गई, हमने सोचा माँ शायद किचन में गई होंगी।थोड़ी देर में माँ फिर घबराती हुई आईं और जल्दी से हम तीनों भाई-बहनों को उठाया। अरे उठ जा शायद स्कूल बंद हो गया है,इलाके में दंगा होने वाला है। हमलोग सहमते हुए उठे और एक-दूसरे के साथ सिमट गए। माँ बोलीं, जल्दी-जल्दी ब्रश करके फ्रेश हो जाओ, बाहर मत जाना, छोटे को भी अपने साथ हीं रखना, बाहर शायद दंगा होनेवाला है। कुछ लोगों ने शायद अयोध्या के बाबरी मस्जिद को गिरा दिया है। देश में बड़ा ही तनाव का माहौल है। हम चारों भाई-बहन सहमते हुए बाहर निकले। पहली बार हमने अपने दादा जी के चेहरे पर डर देखा था। वो अपनी आदत के विपरीत बड़े ही नरम स्वर में बोले- बच्चो बाहर कोई मत जाना। विश्व हिन्दु परिषद वाले लोग घूम रहे हैं अपने हथियारों के साथ शायद हिन्दू-मुसलमानों का दंगा होनेवाला है। वो हमें अपने ढंग से समझाकर अपने कमरे में चले गए। आगे पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें -

http://tz.ucweb.com/8_QR5N

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